सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र: सात श्लोक, अर्थ और पाठ विधि

माँ दुर्गा की महिमा अपरंपार

प्रिय मित्रों,

दुर्गा सप्तशती की महिमा अपरंपार है। इसमें 700 श्लोक हैं, जिनका शुद्ध उच्चारण और नियमित पाठ करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए सरल नहीं होता।

लेकिन क्या माँ की आराधना के लिए इतना समय और शुद्ध पाठ कर पाना ही आवश्यक है?

सनातन परंपरा में सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का विशेष महत्व है। इसमें सात श्लोकों के माध्यम से माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनकी कृपा, शरणागत की रक्षा और भय से मुक्ति की प्रार्थना की गई है।

यह स्तोत्र माँ भगवती की उपासना का एक सरल और भावपूर्ण माध्यम है।

श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हुए साधक माँ के प्रति अपनी भक्ति, समर्पण और प्रार्थना व्यक्त कर सकता है।

आइए, इस पवित्र स्तोत्र का पाठ उसके विनियोग और सरल हिंदी अर्थ के साथ करें।

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का विनियोग

विनियोग मंत्र

ॐ अस्य श्री दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र मंत्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यै देवताः, श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं सप्तश्लोकी दुर्गा पाठे विनियोगः।

सरल अर्थ:

इस स्तोत्र के ऋषि नारायण हैं, छंद अनुष्टुप् है तथा श्री महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती इसकी देवता हैं। श्री दुर्गा की प्रसन्नता के लिए इस सप्तश्लोकी स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

पहला श्लोक — महामाया की शक्ति

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥ १॥

अर्थ:

वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के चित्त को भी अपनी शक्ति से आकर्षित करके मोह में डाल देती हैं।

यह श्लोक हमें स्मरण कराता है कि मनुष्य का ज्ञान और बुद्धि भी मोह से परे होने की गारंटी नहीं हैं। माँ महामाया की कृपा से ही साधक अपने भीतर के मोह को पहचानने और उससे ऊपर उठने की प्रार्थना करता है।

दूसरा श्लोक — भय, दुःख और दरिद्रता का नाश

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥ २॥

अर्थ:

हे माँ दुर्गे! आपका स्मरण करने पर आप प्राणियों का भय दूर करती हैं और कल्याणकारी बुद्धि प्रदान करती हैं। दुःख, दरिद्रता और भय को दूर करने वाली तथा सबका उपकार करने के लिए सदैव करुणामयी रहने वाली आपसे बढ़कर कौन है?

तीसरा श्लोक — मंगलमयी माँ नारायणी को प्रणाम

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ ३॥

अर्थ:

हे माँ नारायणी! आप समस्त मंगलों में परम मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारी हैं, सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं और शरण में आए भक्तों की रक्षा करती हैं। हे त्रिनेत्रधारिणी माँ गौरी, आपको नमस्कार है।

चौथा श्लोक — शरणागतों की रक्षक

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ ४॥

अर्थ:

हे माँ नारायणी! आप अपनी शरण में आए दीन-दुःखी और पीड़ित लोगों की रक्षा करने के लिए सदा तत्पर रहती हैं। आप सबकी पीड़ा दूर करने वाली हैं। आपको बार-बार नमस्कार है।

पाँचवाँ श्लोक — सभी भयों से रक्षा की प्रार्थना

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥ ५॥

अर्थ:

हे माँ दुर्गे! आप सभी स्वरूपों में विद्यमान, समस्त जगत की अधीश्वरी और सभी शक्तियों से सम्पन्न हैं। हे देवी, हमें सभी प्रकार के भयों से बचाइए। आपको नमस्कार है।

छठा श्लोक — माँ की कृपा और शरण का महत्व

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥ ६॥

अर्थ:

हे माँ! प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों और कष्टों को दूर करती हैं तथा अप्रसन्न होने पर मनुष्य की इच्छाओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है। आपकी शरण में आए हुए लोगों पर विपत्ति नहीं आती; आपकी शरण ग्रहण करने वाले स्वयं दूसरों को आश्रय देने में समर्थ हो जाते हैं।

यह श्लोक देवी की शरणागति, कृपा और संरक्षण की भावना को प्रकट करता है।

सातवाँ श्लोक — समस्त बाधाओं के शमन की प्रार्थना

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥ ७॥

अर्थ:

हे तीनों लोकों की अधीश्वरी माँ! आप समस्त बाधाओं का शमन करें और हमारे शत्रुओं का विनाश करें।

इस प्रार्थना में साधक माँ से अपने मार्ग की बाधाओं को दूर करने और विरोधी शक्तियों से रक्षा करने की विनती करता है।

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

1. शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठें।
2. माँ दुर्गा का स्मरण करके श्रद्धापूर्वक विनियोग करें।
3. सातों श्लोकों का यथासंभव शुद्ध उच्चारण करें।
4. प्रत्येक श्लोक के अर्थ को समझने का प्रयास करें।
5. पाठ के अंत में माँ से सद्बुद्धि, करुणा, साहस और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

महत्वपूर्ण बात:

मंत्रों के शुद्ध पाठ के लिए किसी विश्वसनीय, प्रमाणित पाठ से संस्कृत के शब्दों और उच्चारण का मिलान अवश्य करें।

मित्रों, स्तोत्र का पाठ केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रार्थना और आत्मसमर्पण का अवसर भी है।

माँ दुर्गा हम सभी को सद्बुद्धि प्रदान करें, भय और मोह से ऊपर उठने की शक्ति दें तथा हमारे हृदय में करुणा और विवेक का प्रकाश जगाएँ।

जय माता दी! 🙏🏻

प्रभात पांडेय